पानी में डूबने पर भी सुरक्षित रहता है स्मार्टफोन, कंपनियां कैसे बनती है इस वाटर प्रूफ? जाने पूरी प्रक्रिया

आजकल कई Smartphone पानी के अंदर भी सामान्य रूप से कम कर सकते हैं। इसके पीछे खास वाटर प्रूफिंग तकनीक होती है। लेकिन आखिर यह प्रक्रिया कम कैसे करती है?आईए जानते हैं Phone को वाटरप्रूफ बनाने की पूरी प्रक्रिया।

आजकल स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां अपने डिवाइस को वॉटर रेजिस्टेंट तकनीक के साथ लांच कर रही है। बारिश हो या स्विमिंग पूल, यह फोन सीमित समय तक पानी के अंदर भी काम कर सकते हैं। हालांकि कंपनियां इन्हें पूरी तरह वाटरप्रूफ नहीं, बल्कि वाटर रेसिस्टेंट के रूप में पेश करती है। कभी जरा सा पानी लगने पर खराब हो जाने वाले मोबाइल अब के भीतर फोटो और वीडियो कैसे रिकॉर्ड कर पाते हैं? आखिर इसके पीछे कौन सी तकनीक काम करती है? आईए जानते हैं स्मार्टफोन को वाटरप्रूफ या वाटर रेसिस्टेंट बनाने की पूरी प्रक्रिया।

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बाहर से अंदर तक हर स्तर पर होती है तैयारी ऊपर से देखने पर वाटर रेसिस्टेंट फोन बनाना एक साधारण फीचर जैसा लगता है, लेकिन हकीकत में इसके पीछे कई तकनीकी प्रक्रियाएं साथ मिलकर काम करती है।Smartphone को पानी से सुरक्षित रखने के लिए उसकी डिजाइनिंग और असेंबली के हर चरण में खास इंतजाम किए जाते हैं। सबसे पहले फोन तैयार करते समय ऐसे सभी संभावित रास्तों को कम से कम रखा जाता है, जहां से पानी अंदर प्रवेश कर सकता है। प्रेम और बैक पैनल को इस तरह फिट किया जाता है कि उनके बीच किसी तरह का गैप ना रहे। यदि कहीं थोड़ी भी खाली जगह रह जाए, तो पानी अंदर जा सकता है। इसलिए इन गैस को विशेष सीलिंग मटेरियल से मजबूती से बंद किया जाता है, ताकि डिवाइस की अंदरूनी सर्किट्री सुरक्षित रह सके।

चार्जिंग पोर्ट और स्पीकर को कैसे बनाया जाता है वॉटर रेजिस्टेंट ?

Smartphone में चार्जिंग पोर्ट, सिम ट्रे और फिजिकल बटन जैसे कई ऐसे हिस्से होते हैं, जहां से पानी अंदर जाने का खतरा रहता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए कंपनियां सिलिकॉन गैसकेट और रबड़ सीलिंग रिंग का इस्तेमाल करती है। उदाहरण के तौर पर, सिम ट्रे के चारों ओर एक छोटा वाटर रेसिस्टेंट रिंग लगाई जाती है, जो ट्रे को स्लॉट में डालते ही कंप्रेस हो जाती है और पानी या किसी भी लिक्विड को अंदर प्रवेश करने से रोकती हैं, लेकिन साउंड वेव्स को बाहर निकलने देती है, जिससे ऑडियो क्वालिटी प्रभावित नहीं होती है।

बैकअप प्रोटेक्शन लेयर :

इन सभी इंतजामों के बावजूद नामी या पानी के अंश अंदर पहुंच सकते हैं। इससे बचाव के लिए फोन के भीतर एक अतिरिक्त सुरक्षा परत दी जाती है। मदरबोर्ड, कनेक्टर और प्रिंटिंग सर्किट बोर्ड (PCB) और नैनो हाइड्रोफोबिक कोटिंग की जाती है, जो पानी को सतह पर टिकने नहीं देती और उससे दूर धकेल देती हैं।

हालांकि यह कोचिंग पूरी तरह से नुकसान से बचने की गारंटी नहीं देती, बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करती है ताकि आकस्मिक पानी के संपर्क में आने पर डिवाइस सुरक्षित रह सके।

नोट: यह उपरोक्त जानकारी इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त की गई जिसके आधार पर लेख के द्वारा दी गई है इसकी पुष्टि हेतु ऑफिशल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

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